श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण भारत की अन्तर्निहित शक्ति का प्रगटीकरण

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श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण भारत की अन्तर्निहित शक्ति का प्रगटीकरण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रस्ताव श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण भारत की अंतर्निहित शक्ति का प्रगटीकरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय का सर्वसम्मत निर्णय, तत्पश्चात् श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए सार्वजनिक न्यास ‘‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र’’ का गठन, अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को प्रारंभ करने हेतु किया गया अनुष्ठान एवं निधि समर्पण अभियान भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम पृष्ठ बन गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का यह सुविचारित मत है कि उपर्युक्त कार्यक्रमों से भारत की अंतर्निहित शक्तियाँ जागृत हुई हैं तथा ये कार्यक्रम आध्यात्मिक जागरण, राष्ट्रीय एकात्मता, सामाजिक समरसता एवं सद्भाव और समर्पण के अद्वितीय प्रतीक बन गए हैं।

युगाब्द 5122 भाद्रपद कृष्ण द्वितीया (5 अगस्त, 2020) को संपूर्ण विश्व उन क्षणों का साक्षी बनकर भावविभोर हो रहा था, जब भारत के माननीय प्रधानमंत्री, संघ के पूजनीय सरसंघचालक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के न्यासी एवं भारत के सभी मत-पंथों के पूज्य धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति मंदिर निर्माण को प्रारंभ करने हेतु किये गए भव्य कार्यक्रम को आभामयी बना रही थी। भारत के सभी तीर्थों की पावन रज और सभी पवित्र नदियों के जल से यह अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। कोरोना महामारी की भीषणता के समय किया गया यह कार्यक्रम सभी मर्यादाओं का पालन करते हुए सीमित संख्या का रखा गया था, परंतु इसका प्रभाव असीमित था । प्रत्यक्ष उपस्थिति तो मर्यादित थी, परंतु आभासी माध्यमों से समस्त हिन्दू समाज इस कार्यक्रम में भागीदारी कर रहा था। समाज के सभी वर्गों और राजनैतिक दलों ने एकमत होकर इस कार्यक्रम का स्वागत किया था।

मकर संक्रांति के पवित्र दिन भारत के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति के निधि समर्पण और दिल्ली स्थित भगवान वाल्मीकि मंदिर से प्रारंभ हुआ 44 दिन का यह अभियान विश्व इतिहास का सबसे बड़ा संपर्क अभियान सिद्ध हुआ है। लगभग 5.5 लाख से अधिक नगर-ग्रामों के 12 करोड़ से अधिक रामभक्त परिवारों ने भव्य मंदिर निर्माण के लिए अपना समर्पण किया है। समाज के सभी वर्गों और मत-पंथों ने इस अभियान में बढ़चढ़कर सहभागिता की है। ग्रामवासी-नगरवासी से लेकर वनवासी और गिरिवासी बंधुओं तक, सम्पन्न से सामान्य जनों तक सभी ने इस अभियान को सफल बनाने में अपना भरपूर योगदान दिया। इस अद्वितीय उत्साह व सहयोग के लिए प्रतिनिधि सभा सभी रामभक्तों का अभिनंदन करती है।

इस अभियान ने एक बार पुनः यह सिद्ध किया है कि संपूर्ण देश भावात्मक रूप से सदैव श्रीराम से जुड़ा हुआ है। प्रतिनिधि सभा देश के सभी सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं, शिक्षाविदों, प्रबुद्ध वर्गों सहित समस्त रामभक्तों का आवाहन करती है कि वे श्रीराम के आदर्शों को समाज में संचारित करने की दिशा में सार्थक प्रयास करें। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के साथ-साथ सभी के सामूहिक संकल्प और प्रयास से श्रीराम के जीवन-मूल्यों से प्रेरित सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन खड़ा होगा, इसके आधार पर ही वैभवसम्पन्न सामर्थ्यशाली भारत का मार्ग प्रशस्त होगा जो विश्व कल्याण की अपनी भूमिका का निर्वाह करेगा।

श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण भारत की अन्तर्निहित शक्ति का प्रगटीकरण

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