रक्षा बंधन का ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व

शेयर करें

जामुल।श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इसे आमतौर पर भाई-बहनों का पर्व मानते हैं लेकिन, अलग-अलग स्थानों एवं लोक परम्परा के अनुसार अलग-अलग रूप में रक्षाबंधन का पर्व मानते हैं। वैसे इस पर्व का संबंध रक्षा से है। जो भी आपकी रक्षा करने वाला है उसके प्रति आभार दर्शाने के लिए आप उसे रक्षासूत्र बांध सकते हैं।राखी या रक्षाबंधन भाई और बहन के रिश्ते की पहचान माना जाता है। राखी का धागा बांध बहन अपने भाई से अपनी रक्षा का प्रण लेती है। यहां हम आपको रक्षा बंधन का ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व बताने जा रहे हैं।

राखी का एक कथानक महाभारत काल से भी प्रसिद्ध है। शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण की तर्जनी में चोट आ गई, तो द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दी थी। यह भी श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। भगवान ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर यह कर्ज चुकाया था। उसी समय से राखी बांधने का क्रम शुरु हुआ।

लक्ष्मीजी ने बांधी थी राजा बलि को राखी

राजा बलि ने यज्ञ संपन्न कर स्वर्ग पर अधिकार जमाने की कोशिश की थी। बलि की तपस्या से घबराए देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु वामन ब्राम्हण का रूप रखकर राजा बलि से भिक्षा अर्चन के लिए पहुंचे। गुरु शुक्राचार्य के मना करने पर भी बलि अपने संकल्प को नहीं छोड़ा और तीन पग भूमि दान कर दी।वामन भगवान ने तीन पग में आकाश-पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। बलि भक्ति के बल पर विष्णुजी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया। इससे लक्ष्मीजी चिंतित हो गईं। नारद के कहने पर लक्ष्मीजी बलि के पास गई और रक्षासूत्र बांधकर उसे अपना भाई बनाया और संकल्प में बलि से विष्णुजी को अपने साथ ले आईं। उसी समय से राखी बांधने का क्रम शुरु हुआ जो आज भी अनवरत जारी है।

  • Related Posts

    सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर अवैध खनन एवं परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, रेत-मिट्टी और गिट्टी से लदे 4 ट्रैक्टर व 1 हाईवा जप्त
    • September 12, 2026

    शेयर करें

    शेयर करेंरायपुर // जीपीएम जिले में अवैध खनन एवं खनिजों के अवैध परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में सीएम…

    और पढ़ें
    आधुनिक और नगदी फसलों की खेती ने बदली छत्तीसगढ़ के किसानों की तकदीर
    • September 12, 2026

    शेयर करें

    शेयर करेंरायपुर // छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से धान के कटोरे के रूप में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की पहल से राज्य की कृषि अब…

    और पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *