दुर्ग // मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशा के अनुरूप तीन मई को राज्य स्तरीय अक्ती तिहार और माटी पूजन दिवस कार्यक्रम के निर्देशित किया गया,इस क्रम में आज नगर पालिक निगम सीमान्तर्गत पुलगांव स्थित गोकुल नगर गौठान में अक्ती तिहार और माटी-पूजन दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया ,गौठान परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विधायक अरुण वोरा,महापौर धीरज बाकलीवाल, छ.ग राज्य पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष आरएन वर्मा ने परंपरागत विधि-विधान से पूजा अर्चना कर माटी पूजन कर अभियान की शुरुवात की।भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने व वर्मी कंपोस्ट का उपयोग कर खेती को समृद्ध बनाने छग सरकार माटी पूजन।माटी तिहार के अवसर पर विधायक अरुण वोरा ने मुख्यमंत्री के संदेश के साथ विधायक ने भुईया माता की रक्षा की शपथ भी दिलाई।
हम शपथ लेते हैं कि हम हमारी मिट्टी जिसे हम माता, भुईयां कहते हैं उसकी रक्षा करेंगे.हम अपने खेत, बगीचो और घरो में जैविक खाद का उपयोग करेंगे।हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे हमारी मिट्टी, पानी की सेहत खराब हो। हम हानिकारक रसायनो के कारण भूमि, जल को होने वाले नुकसान के प्रति सबको सचेत कर पर्यावरण की रक्षा करेंगे।हम आने वाली पीढ़ियों के लिए साफ पानी शुद्ध हवा और उपजाऊ मिट्टी बचाएंगे की भुईया माता की रक्षा की शपथ। कार्यक्रम के अवसर पर भवन अधिकारी प्रकाश चंद थावनी, स्वास्थ्य अधिकारी गिरीश दीवान,उपअभियंता विनोद मांझी,स्व सहायता समूह एवं गौठान की संचालक श्रीमती गायत्री ढोटे,सुरेश भारती समेत अन्य मौजूद थे।
इस अवसर पर विधायक एवं महापौर ने अक्षय तृतीया अक्त्ति तिहार की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जम्मो संगवारी मन ला जोहार, जग्मो ज्ञान ता अक्ती लिहार के बधाई।आज अक्षय तृतीया है, जिसे हम लोग अक्ती तिहार के रूप में मनाते हैं। अक्षय का अर्थ होता है, जिसका कभी क्षरण न हो। आज के दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। जिस भी काम की आज शुरुआत होती है, उसकी पूर्णता निश्चित मानी जाती हैं। शादी-ब्याह के लिए भी आज के दिन मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती।अक्ती का यह दिन हमारी संस्कृति के साथ-साथ हमारी कृषि परंपरा में भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। आज के दिन से ही नयी फसल के लिए तैयारी शुरु हो जाती है। मिट्टी के गुड्डे-गुडियों की शादी की परंपरा के माध्यम से हमारे पुरखों ने इस त्यौहार को हमारी धरती से भी जोड़ा है। उनका संदेश यही था कि हमारे जीवन का मूल यही माटी है। इसे हमेशा जीवंत मानते हुए, उसका आदर-सम्मान करना चाहिए।
पिछले कुछ दशकों में हमने अपने खेतों में रासायनिक खादों और कीटनाशकों का बहुत ज्यादा उपयोग किया है। इससे हमारी धरती की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। हमारे अनाज विषैले होते जा रहे हैं। हमारे स्वास्थ्य को नुकसान हो रहा है। हमारे पशुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर हो रहा है। हम इस समय जिन तौर-तरीको से खेती कर रहे हैं. वह प्रकृति की पूजा और सेवा की हमारी परंपरा के अनुरूप नहीं है।यह समय अपनी स्वस्थ्य परंपराओं की ओर लौटने का समय है। अपनी माटी और अपनी धरती को यदि हमने अभी नहीं बचाया तो फिर बाद में बहुत देर हो चुकी होगी। इसीलिए पुरखों के बताए रास्ते पर चलते हुए आज अक्ती के शुभ-दिन से हम छत्तीसगढ़ में माटी-पूजन महाभियान की शुरुआत कर रहे हैं। इस महाभियान में हम रासायनिक खादों और कीटनाशकों की जगह जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट और गौ-मूत्र के उपयोग को ज्यादा से ज्याद बढ़ावा देंगे।
रासायनिक खेती से प्रकृति और मानव जीवन को होने वाले नुकसान को लेकर लोगों को जागरूक करेंगे। अपने अन्न को रसायनों के विष से मुक्त करते हुए लोगों को जैविक अन्न के उपयोग के लिए प्रेरित करेंगे। इन सबके साथ-साथ खेती-किसानों में आने वाली लागत के कम करते हुए अपनी खेती को और ज्यादा फायदेमंद बनाएंगे। इस तरह हम अपनी सतत् और टिकाऊ खेती का विस्तार करेंगे। प्रकृति के साथ अपने संबंध को फिर से मजबूत करेंगे।यह महाभियान पूरे छत्तीसगढ़ में एक साथ शुरु हो रहा है। इसके लिए शासन की ओर से अवश्य पहल की जा रही है, लेकिन यह महाभियान हर छत्तीसगढ़िया का अपना महाभियान है। हम सबको मिलकर इसे सफल बनाना है।






