कवर्धा // नया विश्राम गृह सभा कक्ष मे देवर्षी नारद जयंती भगवान नारद जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर प्रारम्भ किया गया। कार्यक्रम मे मुख्य वक्ता आर. कृष्णा दास, अतिथि दिलेश्वर उमरे, अध्यक्षता प्रकाश वर्मा, सूर्यप्रकाश चंद्रवंशी मंचासिन रहे और सम्बोधन किया भूमिका बोधी राम निषाद ने रखा, कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार ध्रुवे जी एवं आभार मुकेश दुबे जी ने किया।
मुख्य वक्ता अपनी उदबोधन मे कहा आज वर्तमान परिदृश्य मे ऐसा एक नॉरेटिव सेट कर दिया गया है कि कहीं पर भी जाने का अवसर मिलता है तो यह सब पत्रकार को ही मिलता है सर्किट हाउस का गेट बंद रहेगा खुल जायेगा और पत्रकारों के लिए एक सबसे बड़ा विषय यही है कि हम इस नरेटिव को किस तरीके से हम उसमें काम कर सकते हैं या जो हमको एक नेरेटिव बताया जाता है जो राष्ट्र विरोधी रहता है उसको हम किस तरीके से स्वीकार करेंगे आज हमारे लिए सबसे बड़ी कार्य है पत्रकारों के बीच में साधारण बात नहीं होना है क्योंकि आज जो नेरेटिव दूसरे रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है यह बहुत बड़ा षड्यंत्र है और यह षड्यंत्र को हम पत्रकारों को भी समझना पड़ेगा कि जो नॉरेटिव हमको दिया जाता है क्या करना चाहिए कि जो समाज में आज सबसे बड़ी चुनौती है वह तीन प्रमुख विषय हैं एक है रेफरेंस दूसरा है नॉरेटिव तीसरा है डिस्कोप इसको रिफ्रेश किए हैं कि रेफरेंस हमको इतिहास ऐसा बताया गया है भारतवर्ष का जिस तरीके से मैंने आपको बताया कि भारत की संभवत विश्व में ऐसा देश होगा इतिहास के प्रश्नों के बारे में बताया जाता है और हमको उसको फिर नेगेटिव नरेटिव के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और डिस्कोप जो अंतिम तीसरा शब्द है
आज महाराणा प्रताप का जयंती है महाराणा प्रताप को भी गलत तरिके से बताने का प्रयास हुआ हल्दीघाटी का युद्ध में महाराणा प्रताप को छोटा दिखाने के लिए या महाराणा प्रताप क्योंकि उनकी जो प्राक्रम थी युद्ध से महाराणा प्रताप भाग गए ऐसे बताया गया जबकि अकबर उसे युद्ध में आये ही नहीं है अर्थात अकबर कभी भी महाराणा प्रताप के साथ में युद्ध करने के लिए गए ही नहीं उनका सहायता मानसिंह ने किया लेकिन हमें इतिहास में पढ़ाया जाता है अकबर स्वयं हल्दीघाटी के युद्ध में गए जबकि वह नहीं गए वह अपने नजदीकी मानसिंह जी को भेजा था उनको उनके नेतृत्व में युद्ध करने भेजें हमारे महाराणा प्रताप के पास में 20000 की संख्या थी और वहां पर लगभग चार गुना ज्यादा 80 हजार लोगों की संख्या में महाराणा प्रताप को कमजोर होना पड़ा जो मेवाड़ का जो एक बड़ा भाग था वह वापस आए रणनीति बनाएं और गोरिल्ला युद्ध जो हम नक्सलियों के बारे में बोलते हैं वह भी महाराणा प्रताप की योजना तैयार के कारण वापस आए और मेवाड़ के बहुत बड़ा भू भाग है वापस आए और जो एक बड़ा भाग के बारे में हिंदुओं का अग्निपथ होता है हमारे लिए अग्नि उद्योग के समान होती है तो लोगों में जो बनाया था सेकुलर बताने की कोशिश। अकबर के बारे में छोटा भी अगर कोई गलतियां होती हैं तो उसको वह मृत्युदंड से ही पूरा करते थे नौकरो के जरिये अकबर जो थे वो किसी चीज से भयभीत रहते थे कि किस तरीके से वह अपने आप को सब चीजों से अलग रखें और अपने आप को समझ में रखे ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम 26 लोगों के समूह था उन्ही 26 लोगों में से 20 लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम पर बहुमत हुए तो जो संगठन का अस्तित्व ही लोकतांत्रिक व्यवस्था से हुआ संगठन के बारे में पूर्व से ही गलत नेरेटिव करने की कोशिश किया गया है समाज मे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को लेकर भ्रामक जानकारिया प्रचलित था और जब नवीन जिंदल जी ने सुप्रीम कोर्ट से कैसे में सार्वजनिक रूप से तिरंगा ध्वज फहराने का प्रत्येक लोग अपने घर, प्रतिष्ठान मे फहरा सकते है सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर हुआ है तब से संघ भी अपने कार्यालय मे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को फहराते आ रहे है इसी तरह गांधी हत्या पर भी संघ के ऊपर आरोप लगा जबकि तत्कालीन सरसंघचालक पूज्यनीय माधव सदाशिव राव गोलवलकर जी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री प. नेहरू जी और गृहमंत्री सरदार पटेल जी को पत्र एवं टेलीफोनिक माध्यम से गहरा संवेदना व्यक्त किया साथ ही 13 दिनों तक संघ कि शाखा नहीं लगा स्वयंसेवकों को निर्देश दिया गया। यह आप हम लोग सभी पत्रकार भी हमेशा सुनते आ रहे है कि गांधी हत्या मे संघ का हाथ है इस तरह नरेटिव गढा गया जबकि गांधी जी की हत्या से संघ जितना विचलित हुआ वह उनके स्वयं के पार्टी के लोग भी नहीं रहे। सरदार पटेल जी को वहां से टेलीग्राम भेजो गांधी जी के प्रतिनिधि समिति जानता है।
विषम से विषम परिस्थितियों में 13 दिन तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में भी कहा जाता है महाराणा प्रताप के रूप में सामने आने वाला है सशस्त्र आंदोलन को दोनों देखा है मैं भी उनके साथ में नक्सलवाद क्या होता है उसको समझने का प्रयास किया है। मुझे ऑफर आया कि आप जाना चाहते हैं क्या पत्रकारिता के क्षेत्र था युवावस्था क्या होता है लेकिन रायपुर में पूरी अलग विचार है की विचारधारा से कार्यकर्ता हूं तो आप लोग को बिल्कुल उसके तुरंत बाद जो है फरवरी 2000 की घटना होगी नारायणपुर में पहला ब्लास्ट हुआ सबसे बड़ा दुःखद घटना का साक्षी रहा उसमें 21 जवान शहीद हुए। अतः आज हम सब पत्रकार साथियों को निर्भीक और निष्पक्ष होकर समाज को सही बातो का रखना होगा यह कलम कि ताकत है।
समस्त पत्रकारों को सम्मान किया गया है पत्रकारों के साथ ही गणामान्य लोग राधेश्याम पाली, हलधर नाथ योगी, रवि कांत आमदे, श्री धीरज उपस्थित रहे।






