अबूझमाड़ में फैलता संचार नेटवर्क : देश दुनिया से जुड़ते सुदूर अंचल के ग्रामीण 

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रायपुर // छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ कहे जाने वाले क्षेत्र नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिलों जहां तक पहुंचपाना बेहद मुश्किल था। वहां के निवासी लम्बे समय से मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए थे। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं ने इस नामुमकिन को मुमकिन में बदल दिया है। पिछले चार सालों में इस क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की किरण हर घर तक पहुंच रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के वनांचल के विकास के लिए विकास, विश्वास और सुरक्षा की रणनीति अपनाई गई है। 

अबूझमाड़ में इस रणनीति के तहत सड़क और संचार नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। शासन द्वारा वनांचल के दुर्गम, पहुंच विहीन, संवेदनशील स्थानों पर जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है, वहां नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं और मोबाइल नेटवर्क को अपग्रेड करने का भी काम किया जा रहा है। जिससे कोई भी व्यक्ति इंटरनेट सुविधा से अछूता न रह सके।
      

दंतेवाड़ा जिले के सीमा से लगे अबूझमाड़ इलाकों में भी अब तेजी से सड़क और संचार नेटवर्क की सुविधा मिल रही है। दन्तेवाड़ा में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से संचार सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण का काम तेजी से कराया जा रहा है। दन्तेवाड़ा सीमा से लगे अबूझमाड़ में बसे गांव मालेवाही ऐसा क्षेत्र हैं, जहां वर्षों से मोबाइल नेटवर्क नहीं था। जिससे यहां रहने वाले ग्रामीणजन देश-दुनिया की उपलब्धियों, डिजीटीकरण और ऑनलाइन सुविधाओ से वंचित थे। गांव के लोगों को पहले एंबुलेंस बुलाने या आपातकालीन स्थिति में कई बार पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर सफर करना पड़ता था तब बड़ी मुश्किल से बात हो पाती थी। मोबाइल टावर लगाए जाने से उन्हें आसानी से संचार सुविधा मिल रही है। मालेवाही में मोबाइल टॉवर स्थापित होने से ग्रामीण जनों में उत्साह देखने को मिल रहा है। टॉवर लगने से सूचनाओं के आदान-प्रदान अब सहज हो गया है। 

इन्टरनेट की सुविधा मिलने से ग्रामीण जनजीवन में अब तेजी से जागरूकता आ रही है। आने वाले समय में ग्रामीण अंचल में रह रहे हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा दुर्गम और पिछड़े इलाकों में तेजी से सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। इन सब कार्यों से राज्य शासन की योजनाओं की पहुंच गरीब तबकों तक पहुंचना आसान हुआ है। 

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