चीन के लिए जासूसी करने वाला पत्रकार गिरफ्तार, धनशोधन मामले में ईडी की कार्रवाई

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https://www.panchjanya.com/Encyc/2021/7/5/Journalist-arrested-for-spying-for-China-ED-action-in-money-laundering-case.html

नई दिल्ली।ईडी का कहना है कि नकदी के अलावा, विभिन्न चीनी कंपनियों और भारत में कुछ अन्य व्यापारिक कंपनियों के बीच मोटी रकम का लेन-देन हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। अपनी आपराधिक गतिविधियों पर परदा डालने के लिए राजीव शर्मा ने बेनामी बैंक खातों के जरिए भी पैसे लिए

इससे पहले केंद्रीय खुफिया एजेंसी की सूचना पर दिल्‍ली पुलिस की विशेष शाखा ने उसे 14 सितंबर, 2020 को गिरफ्तार किया था। उस समय उसके पास से रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए थे। बाद में पुलिस ने एक चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार किया था। हालांकि दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय से उसे पिछले साल दिसंबर में जमानत मिल गई थी

2016 से चीन के संपर्क में था
राजीव 2016 से चीनी एजेंट और कुछ चीनी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में था और उन्‍हें भारत-चीन सीमा से जुड़ी सूचनाएं, सीमा पर सेना की तैनाती और सरकार की रणनीति जैसी सूचनाएं उपलब्‍ध कराता था। दिल्‍ली पुलिस द्वारा शासकीय गोपनीयता अधिनियम और भादंसं की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज के आधार पर ईडी ने उसके खिलाफ धनशोधन मामले की जांच शुरू की है। इसी सिलसिले में ईडी ने 1 जुलाई को 62 वर्षीय राजीव को गिरफ्तार किया। उसे 2 जुलाई को स्‍थानीय अदालत में पेश कर ईडी ने 7 दिन के रिमांड पर लिया है

हर जानकारी पर 1000 डॉलर
राजीव को रक्षा मंत्रालय से जुड़ी हर सूचना के एवज में 1,000 डॉलर मिलते थे। इस तरह, चीन के लिए जासूसी करके उसने करीब सवा साल में 40-45 लाख रुपये कमाए। रक्षा मामलों पर उसके लेख चीन सरकार के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ में प्रकाशित होते थे। राजीव ने 2016 से 2018 तक चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील रक्षा और रणनीतिक सूचनाएं दीं। वह विदेशों में कई बार चीनी खुफिया अधिकारियों से मिला

हवाला के जरिए मिलते थे पैसे
दिल्‍ली के पीतमपुरा के रहने वाले राजीव से पूछताछ के बाद पुलिस महिपालपुर में एक कंपनी पर छापा मार कर चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार किया था। चीनी नागरिक झांग चेंग उर्फ सूरज, झांग लिक्सिया उर्फ उषा, क्वींग शी और नेपाली नागरिक शेर सिंह उर्फ राज बोहरा मिलकर इस कंपनी को चलाते थे। कंपनी से दवाएं निर्यात की जाती थीं। चीन से जो पैसे आते थे, उसका भुगतान मुखौटा कंपनियों के जरिए यहां सक्रिय एजेंटों को दिया जाता था। उनमें राजीव भी था। राजीव के पास से रक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के अलावा, दर्जनभर मोबाइल, लैपटॉप और चीनी एटीएम कार्ड भी मिले थे।

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