वृद्धाश्रम में माँ-बाप को छोड़ने वाले बेटों के ख़िलाफ़ बने कानून वृद्धाओं से मिलकर हुई भावुक- समाज सेवी एवं दुर्ग केंद्रीय जेल संदर्शक : नीलू सिंह

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श्री गणेश उत्सव के पावन पर्व पर वृद्धा आश्रम के 50 बुर्जुर्गो को शाल और उनकी जरूरत की चीजें भेजकर बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया:

दुर्ग। अपने माता पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ने वाले पुत्रों पर कठोर से कठोर सजा हो, वह सभी सुविधाओं से महरूम हो सके, उन्हें नौकरी ना मिले,सरकार को ऐसा कानून लाना चाहिए। यह तीखी प्रतिक्रिया जब, श्री गणेश चतुर्थी के पावन उत्सव पर्व पर वृद्ध आश्रम में पहुचकर अपने ससुर और पिता के हाथों से 50 बुजुर्गों को शॉल और उनकी जरूरते की चीजें भेट कर उनसे आशीर्वाद लिया। उन्होंने बुजुर्गों के दवाइयों से लेकर बीमारी के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए उनसे उनकी समस्यों से अवगत हुए
वृद्धा आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों ने अपनी समस्या बताते हुए भावुक हुए और सब भी की आँखे नम हो गई।


इस मौके पर समाज सेवी और जेल संदशक नीलू सिंह ने कहा माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ने की समस्या पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा जो पुत्र अपने माता-पिता का नहीं हुआ। जिन्होंने उसे बचपन से संभाला। मां ने 9 माह कोख में रखा,उसके पिता ने उसके जीवन की रक्षा की। फिर भी वह पुत्र अपने माँ-बाप के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करे तो वह किसका हो सकता है। ऐसे पुत्र को तो कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए। देश की सरकार को इस पर भी एक कानून बनाना चाहिए।ऐसे पुत्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के साथ-साथ उनसे वोट देने का अधिकार छीन लेना चाहिए,सरकारी और प्राइवेट नौकरी भी न मिल सके। इस दौरान आर,पी,सिंह,विंध्याचल सिंह,संजय सिंह,सबिता,दिव्या दिक्षा शक्ति,शोनाली,नामिना शर्मा,मंजू सिंह के अलावा बड़ी संख्या में अन्य मौजूद थे।

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