प्रदेश की सेवा समितियां किसानों पर दबाव बनाकर जबरिया वर्मी कम्पोस्ट गोबर खाद बेच रही :वाजपेयी

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सोसायटियों में जबरिया 10 रुपए किलो में वर्मी खाद की बिक्री से नाराज किसान

भाजपा किसान मोर्चा ने पूछा कि सस्ती है तो फिर जबरिया क्यों बेचनी पड़ रही गोबर खाद?

भिलाई।दुर्ग जिले के किसानों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आधे दाम अर्थात 5 रुपया प्रति किलो में वर्मी कम्पोस्ट खाद उपलब्ध कराने का आफर किया है। भाजपा किसान मोर्चा भिलाई के जिलाध्यक्ष निश्चय वाजपेयी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया है कि छत्तीसगढ़ का किसान सैकड़ों पीढ़ियों से अपने खेत में सूखा गोबर डालता चला आ रहा है जिसे गेंगरवा( हिन्दी नाम केंचुआ) पैरा और फसल के अन्य अवशेषों के साथ खाकर खाद में बदल देता है। इस गेंगरवा खाद को ही अंग्रेजी में वर्मी कम्पोस्ट बोलते हैं। वाजपेयी ने अपने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ का किसान वर्मी कम्पोस्ट का सबसे बड़ा उत्पादक है और इसे अपने खेत में मुफ्त मे ही बना लेता है। उन्होंने 10 रुपया प्रति किलो के हिसाब से बेचे जाने वाले वर्मी कम्पोस्ट को सस्ता बताने संबंधी मुख्यमंत्री के बयान को तथ्यों से परे और किसान विरोधी बताया है। वाजपेयी ने जिले के किसानों की तरफ से आफर दिया है कि यदि सरकार खरीदने की गारंटी ले तो किसान 5 रुपया प्रति किलो की दर अर्थात सरकारी दाम से आधे रेट में वर्मी कम्पोस्ट बनाने और बेचने को तैयार हैं। इससे किसान परिवारों को अतिरिक्त आमदनी भी होने लगेगी। शर्त बस यह है कि यह खाद वापस हम किसानों को ही जबरदस्ती बेचने की साजिश नही रची जाएगी जैसा कि आज हर सोसायटी में किया जा रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश की सेवा समितियां किसानों पर दबाव बनाकर जबरिया वर्मी कम्पोस्ट गोबर खाद बेच रही हैं। जो किसान दस रुपया प्रति किलो के मंहगे दाम पर गोबर खरीदने के लिये तैयार नही होते उसे रासायनिक खाद नही दी जा रही है। इस ज्यादती के लिये किसान तैयार नहीं हैं और इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। लेकिन सेवा समितियां रासायनिक खाद और बीज के नाम पर किसानों को ब्लैकमेल करने से बाज नही आ रही हैं। भाजपा किसान मोर्चा ने किसानों को दस गुना दाम मे जबरदस्ती गोबर बेचे जाने के खिलाफ जमकर हल्ला बोला था। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान आया है कि दस रुपया प्रति किलो के हिसाब से वर्मी कम्पोस्ट खाद छै से दस गुना सस्ती है। इसका असली दाम 64 रुपया प्रति किलो है। मोर्चा के जिलाध्यक्ष वाजपेयी ने मुख्यमंत्री के बयान को गैरजिम्मेदारना और किसान विरोधी बताते हुए आपत्ति जताई है कि यदि आपकी खाद इतनी सस्ती है तो इसे जबरिया क्यों बेचना पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले समय में यह गोबर 64 रुपया प्रति किलो की दर से जबरदस्ती न बेचा जाने लगे। वाजपेयी ने किसानों की तरफ से मुख्यमंत्री को आफर किया है कि सरकार हमसे यह खाद आधे दाम में खरीदने का करार कर ले और दस-बीस गुना मुनाफा स्वयं कमा ले। बस हम किसानों को ब्लैकमेल करके जबरिया यह गोबर दस रुपया प्रति किलो के हिसाब से मत बेचे। वाजपेयी ने भूपेश सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कई टुकड़ों मे मिलने वाले धान की कीमत को भूपेश बघेल उसकी जेब से वापस निकालने के नए-नए तरीके खोजते रहते हैं। कभी धान लाने-ले जाने पर रोक लगाते हैं, कभी खरीदी लेट कराकर फसल का वजन सुखा देते हैं। कभी खेत का रकबा कम कर देते हैं कभी टोकन में भेदभाव की समस्या तो कभी बोरी की कालाबाजारी से किसान जूझ रहा है। ऐसे में गोबर को दस रुपया किलो के हिसाब से जबरिया बेचा जाना सरकार की नई किसान विरोधी साजिश है। वाजपेयी ने अपने पत्र मे अनाप शनाप दाम पर की जा रही गोबर की इस जबरिया बिक्री को तत्काल रूप से बंद करने की मांग की है।

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