निराश्रित पशुओं की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने शुरू की गौधाम योजना

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दुर्ग // निराश्रित, घुमंतु तथा कृषिक पशुओं के संरक्षण को लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गौधाम योजना की शुरुआत की है। यह योजना निराश्रित, घुमंतु तथा कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 (यथा संशोधित) तथा कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2014 के प्रावधानों के अंतर्गत संचालित की जा रही है। निराश्रित, घुमंतु गौवंश तथा जब्त गौवशीय पशुओं का संरक्षण, संवर्धन एवं सुरक्षित विस्थापन सुनिश्चित करना है।

उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं से प्राप्त जानकारी अनुसार इस योजना के अंतर्गत गौधाम की स्थापना के लिए ऐसी शासकीय भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी, जहाँ सुरक्षित बाड़ा, पशु शेड, पर्याप्त पानी, बिजली तथा हरे चारे के उत्पादन के लिए चारागाह भूमि उपलब्ध हो। जिला प्रशासन या गौधाम समिति के प्रस्ताव के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य सेवा आयोग से स्वीकृति प्राप्त करने के पश्चात चयनित संस्थान को गौधाम स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी।

योजना के प्रथम चरण में प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास स्थित शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में गौधाम स्थापित किए जाएंगे। चिन्हांकित भूमि के निकट यदि कोई पंजीकृत गौशाला समिति संचालन हेतु सहमति देती है, तो आयोग की क्रियान्वयन समिति द्वारा ऐसे प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाएगी। गौधाम संचालन के लिए इच्छुक स्वयंसेवी संस्थान (एनजीओ), ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी और सहकारी समितियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत करना होगा।

आवेदन के परीक्षण उपरांत जिला प्रशासन या गौधाम समिति चयनित संस्थान के प्रस्ताव को अनुमोदन हेतु राज्य सेवा आयोग को भेजेगी। गौधाम की स्थापना व संचालन में उन्हीं संस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो गोसेवा, पशुपालन सुधार तथा संचालन के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

गौधाम योजना से संबंधित विस्तृत नियमावली एवं अन्य जानकारी के लिए इच्छुक संस्थाएँ उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएँ, दुर्ग के कार्यालय में संपर्क कर सकती हैं। शासन की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत ‘रुचि की अभिव्यक्ति’ आमंत्रित की गई है, जिसके तहत पात्र संस्थाएँ आवेदन कर सकती हैं।

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