सुकमा के गोण्डा क्षेत्र में 29 भटके युवाओं ने चुना शांति और सम्मान का मार्ग

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रायपुर // छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। सुकमा जिले के गोण्डा क्षेत्र में सक्रिय रहे 29 भटके युवाओं ने हिंसा और भटकाव का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। 

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि उस भरोसे, सुरक्षा और स्थिरता का प्रमाण है जो अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लौट रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जहाँ कभी भय, दबाव और असुरक्षा का वातावरण था, वहाँ अब सुरक्षा शिविरों की सशक्त मौजूदगी, प्रशासन की सक्रियता और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुँच से हालात तेजी से बदल रहे हैं। सुकमा और उसके आसपास के इलाकों में विकास कार्य, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ आम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि “जो हिंसा छोड़कर संविधान और विकास का रास्ता चुनेगा, उसके लिए सरकार सम्मानजनक जीवन, अवसर और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगी।” सरकार का उद्देश्य केवल हिंसा को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन युवाओं को समाज की मुख्यधारा में लौटाकर उन्हें एक नई पहचान और नया जीवन देना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 29 युवाओं का मुख्यधारा में लौटना यह साबित करता है कि अब छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में डर की जगह भरोसा और अंधेरे की जगह उम्मीद ने ले ली है। यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि उस संवेदनशील शासन व्यवस्था का परिणाम है जो संवाद, विकास और पुनर्वास को प्राथमिकता देती है।

राज्य सरकार ने पुनर्वास, कौशल विकास, शिक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि भटकाव छोड़ने वाले युवाओं को समाज में सम्मान, स्थिरता और आत्मनिर्भरता मिले। छत्तीसगढ़ आज स्पष्ट रूप से यह संदेश दे रहा है कि हिंसा नहीं, विकास ही भविष्य है।

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