एसटी आरक्षण घटने से आदिवासी समाज मुखर,दुर्ग में कल चक्काजाम कर जताएंगे आक्रोश

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दुर्ग ।। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति के 32प्रतिशत आरक्षण को घटाकर 20 प्रतिशत किए जाने के विरोध में सर्व आदिवासी समाज पूरे प्रदेशभर में
राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलनरत है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा द्वारा 9 नवंबर को दुर्ग के पटेल चौक में चक्काजाम कर अनुसूचित जनजाति के 32 प्रतिशत आरक्षण की पुन: बहाली की आवाज उठाई जाएगी। इसके अलावा 15 नवंबर को सर्व आदिवासी समाज द्वारा आर्थिक नाकेबंदी कर राज्य सरकार के रवैये के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया जाएगा।

आदिवासी समाज हितैषी आरक्षण बहाली के इस मुद्दे पर आंदोलन के तहत पूर्व में आदिवासी समाज के कांग्रेस विधायकों के घरों के सामने नंगाड़ा बजाकर उन्हें जगाने का प्रयास किया गया था,लेकिन उनके कानों में जूं तक नहीं रहेगी। जिससे आक्रोशित सर्व आदिवासी समाज ने फैसला किया है कि जब तक आरक्षण की पुन: बहाली नहीं हो जाती है,तब तक यह आंदोलन पूरे प्रदेशभर में अनवरत् जारी रहेगा।

छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष एमडी ठाकुर ने मंगलवार को जिला भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा में कही। इस दौरान जिला भाजपा अध्यक्ष जितेन्द्र वर्मा,महामंत्री ललित चंद्राकर,भाजपा नेता प्रीतपाल बेलचंदन,भिलाई अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष राजू नेताम भी मौजूद थे। मीडिया से चर्चा में प्रदेश अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष एमडी ठाकुर ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर आदिवासी समाज के साथ हुए अन्याय ने राज्य सरकार की पोल खोल दी है। राज्य सरकार कहती है कि वह आदिवासी समाज हितैषी है,लेकिन आरक्षण घटने से राज्य सरकार का आदिवासी समाज विरोधी चेहरा सबके सामने आ गया है।

राज्य में अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले 32 प्रतिशत आरक्षण को
घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। 5 जुलाई 2005 को यह आदेश पारित किया गया कि प्रत्येक राज्य में अनुसूचित जनजाति,अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग को कितना प्रतिशत आरक्षण देना है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में 58 प्रतिशत आरक्षण को खारिज कर दिया गया। न्यायालय में राज्य सरकार की ओर से सही ढंग से पैरवी नहीं की गई और लापरवाही बरती गई। जिसकी वजह से आदिवासी समाज के आरक्षण को 32 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। याचिका दायरकर्ता केपी खाण्डे को कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाकर यह साबित कर दिया कि राज्य की कांगे्रस सरकार आदिवासियों के साथ छल और षड़यंत्र कर रही है। इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा आदिवासियों का अहित नहीं होने देने कहना शोभा नहीं देता है।

श्री ठाकुर ने कहा कि आरक्षण घटाना आदिवासी बहुल राज्य में आदिवासियों के मौलिक एवं संवैधानिक अधिकार का हनन है। भूपेश सरकार आदिवासी आरक्षण के विरोध में अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग को उकसाकर छत्तीसगढ़ जैसे शांतिप्रिय राज्य में वर्ग संघर्ष की स्थिति पैदा कर रहे है। छत्तीसगढ़ के 30 आदिवासी विधायकों में 28 विधायक कांग्रेस के हैं। आदिवासी समाज ने अपने मौलिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें विधानसभा में चुनकर भेजा है। ये विधायक अपने क्षेत्र के विकास तथा संवैधानिक अधिकार व हक के लिए लड़ना छोड़कर मुख्यमंत्री के दरबारी बन गए है। जिससे आदिवासियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

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