संस्कृत देवों की भाषा है और जो संस्कृत जानता है वो देवताओं की भाषा को जानता :पांडे

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दुर्ग।विश्व संस्कृत महोत्सव के उपलक्ष्य में संस्कृत व्याख्यान एवं प्रदर्शनी का आयोजन दुर्ग के ताम्रकार धर्मशाला में किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि पंडित मनोज पांडे भागवताचार्य एवं अध्यक्षता प्रोफेसर विमल चंद्र तिवारी पूर्व प्राचार्य कल्याण महाविद्यालय नंदनी रहे, कार्यक्रम में मंच संचालन दिनेश ताम्रकार ने किया। कार्यक्रम के आयोजक प्रोफेसर आचार्य नीलेश शर्मा एवं ईश्वरी देवांगन थे।

तिलक विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा संस्कृत प्रदर्शनी लगाई गई। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पंडित मनोज पांडे के भाषण से आरंभ हुआ उन्होंने कहा की संस्कृत देवों की भाषा है और जो संस्कृत जानता है वो देवताओं की भाषा को जानता है सभी भाषाओं में संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान है हम अपने घरों में जिन भाषाओं का प्रयोग करते हैं वह सब संस्कृत के कारण ही प्रकट होते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करने वाले प्रोफेसर विमल चंद्र तिवारी ने कहा संस्कृत संस्कारवान बनाती हैं जिन्होंने भी संस्कृत पढ़ा है वह संस्कारवान हुए हैं और उनका नैतिक उत्थान अवश्य हुआ है । इस विषय पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर आचार्य नीलेश शर्मा ने कहा कि आधुनिक परिवेश में संस्कृत जानना हर भारतीय का कर्तव्य है, संस्कृत समस्त भाषाओं की जननी है।
ईश्वरी देवांगन ने कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन किया
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