शैक्षणिक ढांचे में एकरूपता लाने के लिए शिक्षा नीति में परिवर्तन आवश्यक : डॉ देवनारायण

शेयर करें

दुर्ग। सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तीन दिवसीय विभाग स्तरीय कार्यशाला का प्रारम्भ सरस्वती शिशु मंदिर में प्रारम्भ हुआ । उद्घाटन सत्र कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर देवनारायण साहू प्रांत संगठन मंत्री विद्या भारती छत्तीसगढ़ थे । अध्यक्षता धर्मराज भावनानी प्राचार्य, सेठ रतन चंद सुराना महाविद्यालय, विशिष्ट अतिथि के रूप में अरुण गुप्ता व्यवस्थापक, शैलेंद्र धोटे उपस्थित रहे । सर्वप्रथम कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण पूजा अर्चना कर किया गया । उसके पश्चात विभाग समन्वयक दीपक सोनी ने कहा कि इस कार्यशाला में दुर्ग विभाग के 50 प्राचार्य, प्रधानाचार्य और वरिष्ठ आचार्य सम्मिलित हुए हैं । तीन दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति विषय पर चिंतन मनन करना है और अपने विद्यालय में उनका क्रियान्वयन करना है । शिक्षा पद्धति के बारे में बताते हुए देवनारायण ने कहा कि शैक्षणिक ढांचे में एकरूपता लाने के लिए शिक्षा नीति में परिवर्तन लाना है । इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपने विद्यालय में लागू करना । इस पद्धति का प्रचार प्रसार करना है । अध्यक्षता कर रहे भवनानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश के विकास के लिए जो शिक्षा पद्धति चाहिए वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल है इस उद्देश्य को लेकर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है ।

सत्र में बहु विषयक उपागम और अंतः विषयक उपागम प्रशिक्षण संजय टिकरिहा प्राचार्य शासकीय विद्यालय गॉड पैंट्री द्वारा, तृतीय सत्र में रक्षा सिंह प्राचार्य शंकराचार्य महाविद्यालय द्वारा, अनुभव आत्मक अधिगम पर चौथा सत्र में डॉक्टर पार्थ राय प्रोफेसर बीआईटी दुर्ग द्वारा, सीटी बेस्ट लर्निंग पंचम सत्र में श्रीशांत डे द्वारा, कृतिम उद्यमिता और आईटी पर षष्ठ सत्र में पीवी मूर्ति डाइट दुर्ग द्वारा अनुभव आत्मक अधिगम विषय में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कला और संस्कृति की जानकारी दी गई । जिसमें अलग-अलग समूह में है समूह बनाकर निगरानी नियंत्रण, कक्षा छठवीं से आठवीं तक की औपचारिक शिक्षा, बाल भवन की संकल्पना, अनुभवजन्य अधिगम, व्यवसायिक प्रशिक्षण, शिक्षकों की भर्ती एवं प्रशिक्षण प्रगति कार्ड का मूल्यांकन, क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षण, सीखते रहने की कला का विकास, अवधारणा त्मक समझ पर जोर, प्रभावी प्रबंधन का विचार, हित धारकों को सशक्त बनाना, कौशल विकास पर जोर, शैक्षणिक परिणाम की उत्कृष्टता आदि विषयों पर समूह में चर्चा किया गया ।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रादेशिक सचिव जोरावर सिंह ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी प्रकार की शिक्षा जो कि विद्यार्थी द्वारा प्राप्त की जाए तथा उच्च शिक्षा के निश्चित उद्देश्य हो वह निर्देशात्मक हो उसे देखरेख की सुविधा हो शिक्षा नीति का उद्देश्य अपने इतिहास को प्रणाम हमारे महापुरुष जो जो सिद्धान्त दिए हैं उसे अनुकरण करना यह मुख्य उद्देश्य है । शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए । शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सात्विक दृष्टि से संपूर्ण हो । आधारभूत शिक्षा पर विशेष ध्यान देवें ।यह मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई हो । राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य बच्चों को स्वावलंबी बनाकर जीवन जीने की कला प्रदान करना है ।

  • Related Posts

    किसान हितैषी नीतियों ने दिलाई छत्तीसगढ़ को नई पहचान: छत्तीसगढ़ के कृषि विकास मॉडल का अध्ययन करने पहुंचा महाराष्ट्र का विधायक दल
    • June 19, 2026

    शेयर करें

    शेयर करेंरायपुर // मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ में…

    और पढ़ें
    मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने की सौजन्य मुलाकात
    • June 19, 2026

    शेयर करें

    शेयर करेंरायपुर // मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने…

    और पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *