रायपुर // छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित ’सुशासन तिहार-2026’ आम जनता की समस्याओं के त्वरित और संवेदनशील समाधान का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। सुशासन का असली मतलब तब सार्थक होता है जब जनहितैषी योजनाएं फाइलों से निकलकर सीधे जरूरतमंदों के हाथों तक पहुँचती हैं। शासन की इसी संवेदनशीलता की एक जीवंत झलक दुर्ग जिले के नगर पालिका जामुल (वार्ड क्रमांक 13, मंगल भवन) में आयोजित शिविर में देखने को मिली।
दूसरों पर निर्भरता और स्वाभिमान की कशमकश जामुल के वार्ड क्रमांक 16 के निवासी श्री किशन मानिकपुरी लंबे समय से शारीरिक दिव्यांगता के कारण आवागमन की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। सुबह उठने से लेकर दैनिक कार्यों और किसी आकस्मिक परिस्थिति में आने-जाने तक, उन्हें हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। उनका स्वाभिमान इस परावलंबन से रोज कशमकश करता था, लेकिन इस लाचारी से बाहर निकलने का उनके पास कोई साधन नहीं था।
सुशासन तिहार से बदला जीवन, मौके पर ही मिला अधिकार
सुशासन तिहार श्री किशन मानिकपुरी के जीवन में खुशियों की एक नई किरण लेकर आया। शिविर के बारे में पता चलते ही किशन अपनी एक छोटी सी आस लेकर मंगल भवन पहुंचे और ट्राई-साइकिल के लिए आवेदन किया। प्रशासन ने उनके आवेदन पर बेहद संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई की और नगर पालिका अध्यक्ष श्री ईश्वर ठाकुर के हाथों किशन को मौके पर ही चमचमाती हुई ट्राई-साइकिल प्रदान की गई।ष्जैसे ही ट्राई-साइकिल का हैंडल मेरे हाथ में आया, मेरा खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आया।
खुशियों का आधार बन गया शिविर
अब मुझे अपने छोटे-छोटे कामों या किसी भी आपातकालीन स्थिति में कहीं आने-जाने के लिए किसी के इंतजार की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुशासन तिहार मेरे लिए सच में खुशियों का आधार बन गया है। किशन मानिकपुरी, लाभार्थी मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार बरसों पुरानी लाचारी का इतनी फुर्ती से मौके पर ही समाधान होने पर किशन मानिकपुरी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्थानीय शासन-प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। यह सफलता दर्शाती है कि सुशासन तिहार अपने नाम के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव लाने का एक सच्चा माध्यम बन चुका है।




