इस बार गुरु नानक जी 554वें जन्मदिन के रूप में मनाया जा रहा है

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धर्म // गुरु नानक जी सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के प्रथम गुरु माने जाते हैं। उनका जन्म कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि पर हुआ था, इसलिए हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसे गुरु नानक का प्रकाश उत्सव या गुरु नानक जयंती भी कहा जाता है। यह पर्व आज यानि कि 27 नवंबर को मनाया जा रहा है। यह सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है और दस सिख गुरुओं में से पहले और सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव जी की जयंती का प्रतीक है। इस अवसर को भक्ति, आध्यात्मिक समारोहों और सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब के भजनों के पाठ के साथ मनाया जाता है। यह दिन न केवल गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं और ज्ञान का सम्मान करता है, बल्कि सिख दर्शन के मूल सिद्धांतों को मूर्त रूप देते हुए एकता, समानता और निस्वार्थ सेवा को भी बढ़ावा देता है।

गुरु नानक जीवनी

गुरु नानक देव का जन्म रावी नदी के किनारे तलवंडी नामक गांव में एक खत्री कुल में हुआ था. इनकी जन्म तिथि को लेकर आज भी इतिहासकारों में मतभेद है. कुछ इतिहासकारों के अनुसार इनकी जन्म तिथि 15 अप्रैल 1470 है परंतु वर्तमान समय में उनकी जन्म तिथि कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है. गुरु नानक देव के पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम तृप्ता देवी था. इनकी एक बड़ी बहन नानकी थी. अपने बचपन में गुरु नानक देव ने कई प्रादेशिक भाषाएं जैसे फारसी और अरबी आदि का अध्ययन किया. नानक जब 5 वर्ष के थे तब उनके पिता ने उन्हें हिंदी भाषा और वैदिक साहित्य का ज्ञान प्राप्त करने के लिए l गुरु नानक ने करतारपुर नामक नगर बसाया था और वहां एक धर्मशाला (गुरुद्वारा) बनवाया था. 22 सितंबर 1540 में गुरु नानक देव का निधन हो गया. अपनी मृत्यु के पहले उन्होंने अपने परम भक्त और शिष्य लहंगा को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया. जो बाद में गुरु अंगद देव के नाम से प्रसिद्ध हुए l

इस पावन अवसर पर देशभर के सभी गुरुद्वारों में खास रौनक देखने को मिलती है। सभाएं आयोजित की जाती हैं। साथ ही गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव पर लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों को शुभकामना संदेश भी भेजते हैं। गुरु नानक जी की दी गई शिक्षाओं पर अमल करने का प्रण लिया जाता है, गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ और लंगर होते हैं. l

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