हिंदुत्व मानव जीवन के लिए सर्वाधिक अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करती है : प्रेमशंकर सिदार

शेयर करें

भिलाई // पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 107वीं जयंती के अवसर पर कला मंदिर सभागार में हिंदुत्व एक जीवन शैली विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छग प्रांत प्रचारक प्रेमशंकर सिदार थे। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व मानव जीवन के लिए सर्वाधिक अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करती है। श्रेष्ठता की ओर उन्मुख करती है। जब -जब हम इस विचार से भटकते हैं तो हमे संकटों का सामना करना पड़ता है।

हिंदुत्व वास्तव में जीवन शैली है। वेद, पुराणों और स्मृतियों के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए सिदार ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, संस्कारों, मान्यताओं, श्रेष्ठ विचारधाराओं और अपने महापुरुषों पर गर्व करना चाहिए। भारत ​की समृद्ध धार्मिक परंपराएं समानताएं तलाशती है। साथ रहने के विचार पर काम करती है। वैश्विक समस्याओं और मानव जाति की चुनौतियों का स्थायी समाधान न तो पूंजीवाद में है और न ही साम्यवाद द्वारा किया जा सकता है। मानव जाति को अधिक मानवीय, गैर-शोषक, समग्र और आध्यात्मिक रूप से उन्नत होना है तो भारत के सभ्यतागत शाश्वत मूल्यों का स्वीकार करना होगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद भी हमें सही सिखाता है। अध्य्क्षता यौमपाद दास ने की। विभाग संघ चालक डॉ. रामस्वरूप शर्मा और पं. दीनदयाल विचार प्रकाशन वाचनालय एवं सेवा समिति, दुर्ग के अध्यक्ष नीतीश चंद्राकर, सचिव दिलेश्वर उमरे, सुनिल साहू, रोशन ताम्रकार विभाग प्रचारक रोशन साहू, जिला प्रचारक अर्जुन कर्ता, सुनील पटेल, महेश यादव, नागेश्वर राव देशदीपक सिंह, निकश साहू , नीलमणि मड़रिया, नेतराम साहू मौजूद थे।

घर-घर में हो रामायण और भगवत गीता का पाठ
उन्होंने उपस्थित जनों से कहा कि अपने बच्चों को रामायण, भगवत गीता व अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने के लिए प्रेरित करें। अगर भरत का चरित्र नहीं पढ़ेंगे तो भातृ प्रेम कैसे समझ पाएंगे। राम को जाने बिना पितृ आज्ञा की समझ कैसे आएगी। विवेकानंद, महाराणा प्रताप और वीर ​शिवाजी के जीवन चरित्र से भी नई पीढ़ी को शिक्षा ग्रहण करने की बात कही।

भारत की छवि को धूमिल करने का प्रयास आज भी हो रहा
सिदार ने कहा कि जिस देश में धरती को मां दर्जा दिया जाता है, स्वर्ग से भी बढ़कर जन्मभूमि को मानते हैं, जहां प्रकृति और वनस्पतियों में भी भगवान का रूप देखा जाता है, यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः जैसी भावना रही हो वहां महिलाओं के प्रति दुराचार, बाल विवाह और सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं कैसे हो सकती है। वास्तव में आततायी मुगलों के आने के बाद समाज में कुछ बुराइयां आई। अंग्रेजों ने हमारी समृद्ध संस्कृति और संस्कारों को नष्ट करने की कोशिश की। आज भी षडयंत्र के तहत विश्व में भारत की छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किसा जाता है।

Advertisements
Wishes
Advertisements
Diwali wish 3
Advertisements
Diwali wish
Advertisements
Diwali wish
  • Related Posts

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को दी दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ
    • November 7, 2026

    शेयर करें

    शेयर करेंदीपावली का पर्व हर घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और नई उम्मीदों का प्रकाश लेकर आए : मुख्यमंत्री श्री साय रायपुर 7 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने…

    और पढ़ें
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्यपाल श्री रमेन डेका को दी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
    • November 7, 2026

    शेयर करें

    शेयर करेंरायपुर // मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज लोकभवन में राज्यपाल श्री रमेन डेका से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

    और पढ़ें

    Leave a Reply