गोवर्धन पूजा से पंचायत स्तर पर शुरू होगा ‘‘पैरादान महाअभियान’’

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सबसे ज्यादा पैरादान करने वाले तीन पंचायतों को किया जाएगा सम्मानित
दुर्ग / धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में जिले का हमेशा विशेष योगदान रहा है। धान से प्राप्त पैरे को पशुधन के लिए चारे के रूप में प्रयोग करना हमेशा से ग्रामीण अंचल में प्रचलन में रहा है। जिले में भी गौठान दिवस से ‘‘पैरादान महाअभियान’’ कि शुरूआत होगी। पहले पैरादान कृषक व्यक्तिगत स्तर पर किया जाता था परंतु वर्तमान में पंचायत के स्तर पर पैरादान किया जाएगा। इस बार जनपद से सर्वाधिक पैरा संग्रहण करने वाले तीन पंचायतों को जिला प्रशासन द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।

ग्राम पंचायत को यह जिम्मेदारी इसलिए सौंपी गई है ताकि पैरादान में कृषक भाईयों का योगदान ज्यादा से ज्यादा हो। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे के द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस अभियान के लिए भागीदार बने। उन्होंने कहा कि पैरा चारे के रूप में पशुओं के लिए सबसे उपयुक्त आहार में से एक है, पैरादान के माध्यम से आप गौधन को सहेजने में भी अपनी महत्पूर्ण भूमिका निभा रहे है।


कई राज्यों में खरीफ की फसल के बाद रबी की फसल के लिए पराली को जलाने के लिए पैरे का इस्तेमाल किया जाता है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इस दिशा में प्रदेश के किसान भी अपना कदम आगे न बढ़ाये इसलिए शासन और प्रशासन के द्वारा ‘‘पैरादान महाअभियान’’ की सुव्यस्थित प्लानिंग की गई है। इसके लिए सभी पंचायत से पैरा संग्रहण की जानकारी मंगाई गई है। जिसके आधार पर पंचायतों को सम्मानित किया जा सके।

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