दुर्ग // छत्तीसगढ़ अनाधिकृत विकास का नियमितिकरण अधिनियम (संशोधन) 2022 व 2024 के अंतर्गत आवेदनों के निराकरण हेतु कलेक्टर अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में विगत दिवस जिला नियमितिकरण समिति दुर्ग की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समिति द्वारा सर्वसम्मति से विभिन्न नगरीय निकायों के कुल 605 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर मंजूरी दी गई।
स्वीकृत किए गए मामलों में सर्वाधिक नगर पालिका परिषद अमलेश्वर के 376 प्रकरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगर पालिक निगम भिलाई-चरौदा के 32, रिसाली के 147, नगर पालिका परिषद जामुल के 15, कुम्हारी के 28, अहिवारा के 4 तथा नगर पंचायत पाटन, धमधा एवं उतई के 1-1 प्रकरण का निराकरण किया गया है। वहीं, स्पष्ट अनुशंसा और आवश्यक जानकारी के अभाव में 111 प्रकरणों को पुनः परीक्षण के लिए संबंधित नगरीय निकायों को वापस भेज दिया गया है। बैठक के दौरान नगर पालिक निगम दुर्ग के 383 और भिलाई निगम के 2,047 प्रकरण भी समिति के समक्ष निर्णय हेतु प्रस्तुत किए गए।
इस पर दोनों निगमों के आयुक्तों ने कलेक्टर श्री सिंह को अवगत कराया कि ये मामले 2 से 3 वर्ष पुराने हैं, इसलिए इनका एक बार फिर से सूक्ष्म परीक्षण किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इस पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने दोनों निकायों के समस्त 2,430 प्रकरणों को स्पष्ट अनुशंसा, दस्तावेजों के सत्यापन और लीज मामलों में स्वामित्व संबंधी कागजातों की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए।
इसके लिए आयुक्तों के हस्ताक्षर युक्त अनुशंसा के साथ मूल नस्ती (फाइल) और सूची प्रस्तुत करने हेतु एक माह की समयावधि निर्धारित की गई है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पूर्व वर्षों की बैठकों में स्वीकृत हो चुके जिन प्रकरणों में आवेदकों द्वारा लगभग 5 करोड़ रुपये की शास्ति (पेनल्टी) राशि अब तक जमा नहीं की गई है, उन्हें अंतिम अवसर के रूप में एक महीने का समय दिया जाए। यदि इस अवधि में राशि जमा नहीं की जाती है, तो अधिनियम के प्रावधानों के तहत इन आवेदनों को निरस्त कर दिया जाएगा और नगरीय निकायों द्वारा आगे की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, गैर-आवासीय (कमर्शियल) प्रयोजन के 2-3 वर्ष पुराने मामलों में पार्किंग और शास्ति शुल्क की गणना पुराने नियमों के आधार पर होने के कारण, अब इन सभी फाइलों को नए अधिनियम/नियमों के तहत नए सिरे से गणना करने और लीज दस्तावेजों की जांच के लिए निकायों को वापस भेजा गया है। बैठक में नगरीय निकायों द्वारा नियमितिकरण से प्राप्त शास्ति राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा निकायों को न मिलने के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। जिस पर समिति ने शासन स्तर पर पत्राचार करने का
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