बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में लाया नवा बिहान

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रायुपर // श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। श्रीमती तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।

श्रीमती सगो तेता ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान बना चुकी

कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।

समूह ने बढाया आगे श्रीमती सगो को

एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण श्रीमती सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।

खेतों में द्विफसली सिंचाई की मिली सुविधा

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं।  फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।

आजीविकामूलक गतिविधियों ने बनाई लखपति दीदी

इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।

जीवन में आया बड़ा बदलाव, महतारी वंदन योजना का भी मिल रहा लाभ

लखपति दीदी श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं।
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