डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में भारत, दुनिया में अग्रणी देश के रूप में उभरा है: डॉ. जितेंद्र सिंह

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दिल्ली // विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित पहले वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य सम्मेलन, प्रदर्शनी और नवोन्मेष पुरस्कारों (ग्लोबल डिजिटल हेल्थ समिट, एक्सपो एंड इनोवेशन अवार्ड्स ) को संबोधित करते हुए, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत जल्द ही विश्व का एक डिजिटल स्वास्थ्य नेता बन जाएगा, क्योंकि हमारे पास दुनिया की सबसे अच्छी एवं आवश्यक शतप्रतिशत कवरेज वाली तकनीकी जनशक्ति की आवश्यकता है और हमारा डेटा दुनिया में सबसे सस्ता है हाल ही में 5जी का शुभारंभ भारत में डिजिटल स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में एक नई क्रांति लाएगा।

पूरी दुनिया ने कोविड-19 के दौरान भारत की नेतृत्व भूमिका को पहचाना, क्योंकि इसने पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म – कोविन (सीओडब्ल्यूआईएन) के माध्यम से 220 करोड़ से अधिक टीकाकरण करवाने की दुर्लभ उपलब्धि हासिल की और यह प्रक्रिया जारी है।

जुलाई, 2021 में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कोविन वैश्विक सम्मेलन (सीओडब्ल्यूआईएन ग्लोबलकॉनक्लेव) को संबोधित करते हुए, सीओडब्ल्यूआईएन) प्लेटफॉर्म को कोविड-19 का सामना करने के लिए दुनिया के लिए एक डिजिटल जन उपयोगिता (पब्लिक गुड ) के रूप में प्रस्तुत किया था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जब कोविड-19 ने हमें प्रभावित किया तब  भारत ने मार्च 2020 में टेलीमेडिसिन उपयोग दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया, और हमने अप्रैल 2020 में आयुष के लिए भी ऐसा ही किया। उन्होंने कहा कि भारत इन दिशानिर्देशों को अधिसूचित कर सकता है क्योंकि हमारा आधारभूत कार्य किया जा चुका था और हम  इस स्थिति के लिए तैयार थे।हमें ‘सभी के लिए ऐसा डिजिटल स्वास्थ्य’ सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, जो ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ प्राप्त करने के लिए एक पूर्व शर्त है।

 भारत में डिजिटल स्वास्थ्य के लिए एक समर्पित मिशन मोड कार्यक्रम है- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, जिसने लगभग 22 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड दिए हैं। आयुष्मान भारत योजना पात्र लाभार्थियों को सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान करती है। उन्होंने यह भी बताया कि 15 अक्टूबर, 2022 तक, जबकि ई-संजीवनी टेली परामर्श 60 लाख 72 हजार हैं और ई-संजीवनी एचडब्ल्यूसी (प्रदाता-से-प्रदाता) लगभग 50 लाख 84 हजार तथा ई-संजीवनी बहिरंग रोगी (ओपीडी) संख्या प्रति 10 लाख (रोगी-से-डॉक्टर)  90 हजार पर है।

15 अगस्त,2020 को लाल किले की प्राचीर से “राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन” की प्रधानमंत्री की क्रांतिकारी घोषणा का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, उपचार में चुनौतियों को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाएगा । उन्होंने मोदी जी के हवाले से कहा कि ‘हर भारतीय को स्वास्थ्य पहचान क्षेत्र (हेल्थ आईडी) दी जाएगी। यह हेल्थ आईडी हर भारतीय के स्वास्थ्य खाते (हेल्थ अकाउंट) की तरह काम करेगी। 

महामारी की चुनौतियों पर ध्यान देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड-19 ने दुनिया भर में स्वास्थ्य में प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर अपनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, महामारी के दौरान, दुनिया में ठहराव आ गया था, और चूंकि डॉक्टर मरीजों से नहीं मिल सकते थे, इसलिए सभी को जुड़ने के लिए तकनीक अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2016 में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) में डिजिटल स्वास्थ्य संकल्प ( हेल्थ रिजॉल्यूशन) का प्रस्ताव रखा था, और यह विश्व स्वास्थ्य संगठन में डिजिटल हेल्थ के लिए पहला प्रस्ताव था और भारत ने डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनने के लिए अपनी दृष्टि बनाए रखी थीं। उन्होंने यह भी बताया कि 2017 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने डिजिटल स्वास्थ्य के लिए इकोसिस्‍टम के दृष्टिकोण के बारे में बात की थी और इसने टेलीमेडिसिन सेवाओं को महामारी की शुरुआत से बहुत पहले प्रस्तावित स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों का एक अभिन्न अंग बनाने का प्रस्ताव दिया था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन के अंत में कहा  कि भारत दुनिया की सबसे  उन्नत ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली बन गया है, भेषज (फार्मास्यूटिकल्स), नैदानिकी,(डायग्नोस्टिक्स), अस्पतालों और बीमा क्षेत्र में काम करने वाले चिकित्सकों और पेशेवरों को तेजी से डिजिटलीकरण के लिए अपने प्रयासों की योजना बनानी होगी।

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